अमेरिका ने की भारत द्वारा जलवायु समझौते के अनुमोदन की सराहना

वाशिंगटन, ( भाषा ): अमेरिका ने भारत द्वारा पेरिस समझौते का अनुमोदन किए जाने को ‘शानदार खबर’ बताते हुए कहा है कि इस समझौते का पूर्ण क्रियांवयन जलवायु परिवर्तन के कुछ सबसे बुरे प्रभावों से बचने में मददगार साबित होगा।
भारत द्वारा जलवायु समझौते का अनुमोदन किए जाने के एक दिन बाद कल व्हाइट हाउस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता नेड प्राइस ने कल ‘पीटीआई भाषा’ को बताया, ”अमेरिका द्वारा सितंबर में इस समझौते का अनुमोदन किए जाने के बाद भारत का इससे जुडऩा इस साझा लक्ष्य की पूर्ति का संकेत देता है और यह पेरिस समझौते के इस साल लागू करने की दिशा में एक अहम कदम है।”
उन्होंने कहा, ”इस समझौते का पूर्ण क्रियान्वयन जलवायु परिवर्तन के कुछ सबसे बुरे प्रभावों को टालने या उनसे बचने में मदद करेगा और आने वाले वर्षों में अधिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करेगा। हम इस लक्ष्य की पूर्ति की दिशा में हमें आगे लेकर जाने वाले भारत के कदम की सराहना करते हैं।
उन्होंने कहा, ”प्रधानमंत्री नरेंद, मोदी ने इस साल जून में अपनी वाशिंगटन यात्रा के दौरान राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ हुई बैठक में पेरिस समझौते को इस साल से लागू करवाने के लिए इसके त्वरित अनुमोदन से जुड़े अपने साझा नजरिए पर चर्चा की।
विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता एलिजाबेथ ट्रूडो ने कलल संवाददाताओं से कहा, ”हम इसका स्वागत करते हैं। यह एक शानदार खबर है। कई अन्य देशों की तरह, भारत अपनी घरेलू प्रक्रिया को जल्दी से जल्दी पूरा करने के लिए काम कर रहा है। हम इसे लेकर प्रोत्साहित हैं ”
190 से ज्यादा देशों ने पिछले साल दिसंबर में पेरिस समझौते को स्वीकार किया था। इस समझौते के लागू होने से पहले, विश्व के कम से कम 55 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार कम से कम 55 देशों को औपचारिक तौर पर इसका अनुमोदन करना होगा। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक है। इसने रविवार को ऐतिहासिक पेरिस जलवायु समझौते का अनुमोदन किया और इस साल के अंत में लागू हो सकने वाले इस समझौते को एक नया बल प्रदान किया। भारत के इस कदम के साथ, अब कुल 62 देश इस समझौते का अनुमोदन कर चुके हैं। ये देश कुल 52 प्रतिशत उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार हैं।

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